"रेवा संग महेश्वर यात्रा........."
ढलती शाम को महेश्वर में जैसे ही हमारी वैन दाखिल हुई एक अजीब सी अनुभूति ने मन को छू लिया। पुराने बाज़ारों की शाम की रौनक। तंग गालियाँ, जहाँ एक-दूसरे से सटे हुए घर और दुकानें। अधिकांश घरों में पुराने मंदिर और अपने वैभवशाली इतिहास को याद करते हुए कुछ पुराने लकड़ी के नक़्क़ाशीदार घर। शहरों की आपाधापी से दूर कुछ लोग,जिनकी बाज़ार की दुकानों पर रोज शाम को बैठक हुआ करती है। हमारी वैन ने सीधे घाट का रुख किया,और हम अपना सारा सामान वैन में रख कर अपने-अपने कैमरे संभालते हुए जा पहुँचे नर्मदा घाट पर। घाट जो शाम को अक्सर टहलने आने वाले लोगों से पटा हुआ रहता है। आज भी था। नर्मदा अपने वही पुराने स्वरूप को लेकर पूर्व से पश्चिम की ओर अनवरत यात्रा कर रही थी। दोपहर की उमस से परेशान अधिकांश लोग स्नान के लिए तैयार थे। और कुछ वयस्क लोग थे जो अपने अंतिम पड़ाव में अपने किये हुए पाप को धोने की चेष्टा कर रहे थे। जिसे हिंदू धर्म में पुण्य स्नान कहा जाता है। पाप को धोकर पुण्य की कामना!!!!! अजीब है। परंतु हिन्दू धर्म में मान्यता है। नर्मदा भी शायद यही कार्य अनवरत किये जा रही है। इतने भव्य और गौरवशाली इतिहास क...