Posts

Showing posts with the label Tomb

ख़ामोश तान से एक विलंबित मुलाक़ात !

Image
ख़ामोशी आपको अतीत में ले जाती है। जहाँ केवल नीरवता बहती है। लेकिन जहाँ सुरों का रस बहता हो वहाँ जीवन रस हमेशा रहता है किसी दूसरे रूप में! रात के आठ बजे का समय और मैं ग्वालियर के क़िले पर खड़े होकर तानसेन को महसूस करने की कोशिश कर रहा था। तभी अंतर्मन से एक आवाज़ आयी-"तुम यहाँ से कहाँ जाओगे?" सवाल भौगोलिक से कहीं ज़्यादा आध्यात्मिक था। मैं अंदर से खाली-सा महसूस कर रहा था। मैंने अपने आप को उत्तर देना चाहा लेकिन मेरी अपनी आवाज़ उस विशाल स्थल पर खोखली-सी लग रही थी। मैंने उस रात की हवा में गहरी साँस ली। मैं सोचता हुआ कुछ पल ख़ामोश रहा। अपने आसपास असहज-सा धुँधलका महसूस कर रहा था मैं! जब पूर्वानुमान की कँपकँपी आपके शरीर में एक थिरकन पैदा करती है तब इस तरह की स्थिति में एक अजीब-सी बेचैनी होती है। अनिश्चित-सा मैं वहाँ पल-भर खड़ा रहा और सुनने की कोशिश करने लगा। जो एकमात्र मायूस आवाज़ मुझको सुनाई दी, वह शहर के बाहर उस मक़बरे की तरफ से आती हुई ठंडी हवा की आवाज़ थी जो क़िले के बाहर बनी समय की खाई से बहकर आ रही थी। वैसे भी ऐतिहासिक चीज़ों से आती हुई आवाज़ें सरकार की उदासीनता के कारण आजकल कराह रह...